रांची
राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि किसानों और मत्स्य पालकों की आय में बढ़ोतरी ही सरकार की योजनाओं की असली कसौटी है। आय में वृद्धि से ही यह आकलन होगा कि योजनाएं जमीन पर कितनी सफल हैं। वह रांची के धुर्वा स्थित शालीमार मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित मत्स्यिकी विषयक कार्यशाला सह संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं।
मंत्री ने बताया कि इस वर्ष राज्य में 260 वेद व्यास आवास योजना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और चिन्हित लाभुकों के बीच आवास का वितरण शुरू कर दिया गया है। कार्यक्रम के दौरान 540 लाभुकों के बीच 964.37 लाख रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया, जिसमें पिकअप वैन, आइस बॉक्स, केज हाउस, मोटर चालित नाव, गिल नेट सहित अन्य सामग्री शामिल है।

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि वेद व्यास आवास योजना के तहत मछुआरों को पक्का मकान उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे मिट्टी के घरों में रहने वाले परिवारों का सपना साकार हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि वेद व्यास आवास की पहचान नीले रंग से की जाए, ताकि यह योजना गांव-गांव और घर-घर तक एक स्पष्ट संदेश के साथ पहुंचे और अन्य लोग भी मत्स्य पालन से जुड़ने के लिए प्रेरित हों।
मंत्री ने कहा कि आज रोजगार को लेकर महिलाओं में अधिक उत्साह देखने को मिल रहा है। सरकार भोजन से लेकर आवास तक की योजनाएं चला रही है, लेकिन आत्मनिर्भरता के लिए स्वयं के रोजगार से आय अर्जित करना भी जरूरी है, खासकर बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए। उन्होंने कहा कि राज्य की गठबंधन सरकार एक कल्याणकारी सरकार है और मत्स्य पालकों को न केवल झारखंड में बल्कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भेजकर आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि झारखंड में मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। फिलहाल राज्य में करीब 4 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन हो रहा है, जबकि क्षमता 7 लाख मीट्रिक टन तक की है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग और मत्स्य पालकों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दीकी, मत्स्य निदेशक डॉ. एच.एन. द्विवेदी, उप सचिव राजीव रंजन तिवारी, संयुक्त निदेशक अमरेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
